ये दुनिया ……………

ये दुनिया है एक बिछोना,
यहीं पर जीना,
और यहीं है,
हमेशा के लिए सोना,
इन्सान तो है,
खुदा के लिए बस,
मिट्टी का एक खिलोना,
ये दुनिया …………………….
इन्सान जानता है,
मौत ही आखिर,
पड़ाव है उस के,
खुशी और गम,
पहलु हैं जिंदगी के,
दुनिया का दस्तूर है,
हँसने के बाद रोना,
ये दुनिया ………………..
लोग करते हैं खूब मेहनत,
कुछ बनने के लिये,
लड़ते हैं खुद से ही,
अपने असल हक़ के लिये,
और बहाते हैं,
अपना खून पसीना,
शायद वो ये नहीं जानते,
ये दुनिया ………………………
दो पल में ही,
पूरी हो जानी हे जिंदगी,
पूरी उम्र लगा देता हे इन्सान,
ढूंढने में चीजे,
उस की पसंद की,
सच तो है,
बस आखिर में,
मिट्टी में मिल जाना,
ये दुनिया ……………………

तुमसे ही जिंदगी ………….

तुमसे ही जिंदगी शुरू है,
तुम बिन जिंदगी ख़त्म है,
तुमसे मिलने के बाद मुझे लगा,
जैसे मुझ पर खुदा का करम है,
जी ऐसा करता है कि,
तेरी नशीली आँखों में,
डूब जांऊ मैं.
तुमसे ही जिंदगी में सुरूर है,
तुमसे ही ……………………
तुमसे ही मेरी हदें बढ़ी है,
तुमसे ही मेरी कायनात खड़ी है,
तुमसे ही जिंदगी की कश्ती,
चल पड़ी है,
तुमसे ही मेरी किस्मत,
आज बाहें फैलाकर खड़ी है,
तुमसे ही जिंदगी में गुरूर है,
तुमसे ही ……………………….
तुमसे ही अनकही बाते हैं,
तुमसे ही अनछुई यादें हैं,
तुमसे ही हसीन मुलाकातें हैं,
तुमसे ही हर बात में,
शामिल अदाएं हैं,
तुमसे ही जिंदगी में सुकून है,
तुमसे ही ……………………….
तुमसे न मिला था,
तो खुद से अनजान था मैं,
तेरे चेहरे में ही
खुद का अक्स,
आज देखता हूं मैं,
लोगों से बातें नहीं करता,
तेरे ख्यालों में ही,
खोया रहता हूं,
तो लोग कहते हैं,
मगरूर हूं मैं,
पर मैं तो बस,
इतना जानता हूं कि,
तुमसे ही ज़िंदगी शुरू है …………

तू ही ……………….

तू ही मर्ज,
तू ही दवा है,
तुझे जिसने बनाया,
वो काबिल-ए-तारीफ़ खुदा है,
तेरे साथ मेरी जिंदगी गुजरे,
तो जैसे खुदा की भी रज़ा है,
तू ही …………………..
तू ही हर्फ़ ,
तू ही अदा है,
मैं नहीं करूँगा दगा तुझसे ,
ये मेरा तुझसे वादा है,
मैं जो चाहता हूं तुझसे,
वो सिर्फ तेरी वफ़ा है,
तू ही ………………………….
तू ही माहताब,
तू ही कहकशा है,
तू ही मेरा सारा जहाँ है,
तू ही मेरे जीने का सहारा है,
तुमसे जिंदगी में मेरी,
आती खुशनुमा बहार है,
तू ही ………………………
तू ही आग,
तू ही हवा है,
तू ही मेरे लिये,
नीला आसमान है,
तेरी बात मेरे लिये,
गम में भी मज़ा ह,
तेरी नशीली याद मेरे लिये,
ला-इलाज़ में भी शफा ह,
तू ही ………………………
तू ही मंजिल,
तू ही रास्ता है,
मेरा तो हो गया,
तुमसे वास्ता है,
तुमसे जुड़ गया,
मेरा दिल है,
तू ही खुशबू,
तू ही कमल है,
तू ही ………………………..

सुन लो तुम ……….

सुन लो तुम,
मेरे दिल की आवाज़,
बज रहे हैं,
दिल में मेरे,
तेरे प्यार के साज़,
ज़िन्दगी में बस,
तेरी ही थी कमी,
तेरे बिन मेरी,
आंखो में थी नमी,
आज तुम बन गयी हो,
मेरी जिंदगी की सरताज,
सुन लो तुम ……………..
मैं बस तुमसे ही,
प्यार करता हूं,
दिल-ओ-जान तुम्हीं पर,
निसार करता हूं,
किसी बहाने से ही सही,
पास आ जाओ,
तुम मेरे आज,
सुन लो तुम ……………….
मैं देखता हूं रातों में,
सिर्फ तेरे ही ख्वाब,
तुम हो मेरी बेगम,
मैं हूं तेरा नवाब,
मुझे तेरी याद के अलावा,
ना कोई काम है,
न कोई काज,
सुन लो तुम ……………………
अन्दाज तुम्हारा,
है सबसे जुदा,
सबसे अलग है,
तेरी हर खता,
मेरे दिल का हाल,
पता हे मुझे,
तेरे दिल का हाल भी,
है मुझे पता,
मुझे पसंद आता है,
तेरा हर अंदाज,
सु़न लो तुम …………………..

सवाल …………..

सवाल करता है दिल मुझसे,
जवाब मांगता हुं मैं तुझसे,
मैं हो चूका हूं तेरा,
तुझसे मिला हुं जब से,
मैं जुड़ गया हूं,
तेरे प्यार की डोर से,
सवाल ……………………
मैं ज़िंदगी कर चुका हूं,
बस तेरे ही नाम,
दिल मेरा देता है तुझे,
बस एक ही पैगाम,
कभी पुकार ही लेना मुझे,
तू कहीं दूर से,
सवाल ………………….
दर्द देती है तेरी यादैं,
इस नाज़ुक से दिल पर,
अब तो आदत हो गयी है,
जीत पा ली है,
मैंने इस दर्द पर,
आराम महसूस करने लगा हूं,
हर पल मेरे जख्मो पर,
तेरी यादों के मरहम से,
सवाल …………………….
मैं हर पल तुझे,
अपने पास महसूस करता हूं,
मैं हर दिन तुझ पर,
निसार करता हूं,
मैं प्यार करता ह,
तुझे पूरे दिल से,
सवाल …………………….

पहली बार देखी है …………

हुस्न तो बहुत है दुनिया में,
हसीनायें भी खूब देखी हैं,
पर तुझ जैसी नाजनीन,
पहली बार देखी है ………….
शरीफ तो बहुत हैं दुनिया में,
शराफत भी खूब देखी है,
पर तुझ जैसी मासुमियत,
पहली बार देखी है ……………
दिल वाले तो बहुत हैं दुनिया में,
दिलदार भी खूब देखे हैं,
पर तुझ जैसी आवारगी,
पहली बार देखी है …………
नाजुक तो बहुत हैं दुनिया में,
नजाकत भी खूब देखी है,
पर तुझ जैसी अदा -अत,
पहली बार देखी है …………..
दोस्त तो बहुत हैं दुनिया में,
यार भी खूब देखे हैं,
पर तुझ जैसी हबीब,
पहली बार देखी है …………….
काम तो बहुत हैं दुनिया में,
कारनामे भी खूब देखे हैं,
पर खुदा की तुझ जैसी करामात,
पहली बार देखी है ……………
अदाएं तो बहुत है दुनिया में,
अदा-कारा भी खूब देखी हैं,
पर तुझ जैसी शर्म,
पहली बार देखी है ……………..

कुछ लोग ………………

कुछ लोग,
बहुत कुछ पाने के लिये,
कुछ छोड़ दिया करते हैं,
कुछ लोग,
बहुत कुछ हासिल करने के लिये,
कुछ गंवा दिया करते हैं,
ये वो लोग होते हैं,
जिन्हें जमाने की,
परवाह नहीं होती,
ये लोग तो अपने उसूलों पर,
जिया करते हैं,
कुछ लोग …………………..
बहुत से लोग तो ऊपर उठने की,
कोशिश ही नहीं करते,
उपर उठने वालों को भी,
नीचे गिरा देते हैं,
पर कुछ लोग,
बहुत ऊपर उठने के लिये,
थोड़ा झुक जाया करते हैं,
कुछ लोग …………………
बहुत से लोग तो,
आगे बढ़ने की,
कोशिश ही नहीं करते,
आगे बढ़ने वालों की,
राह में भी,
कांटे बिछा देते हैं,
पर कुछ लोग बहुत आगे,
बढ़ने के लिये,
थोड़ा पीछे,
हट जाया करते हैं,
कुछ लोग ……………………..

खुशियाँ …………..

खुशियाँ बरस रही है जिंदगी में,
जब से तू इस हयात में आई है,
तू मेरे लिए दुखो में भी,
खुशियों की सौगात लायी है,
खुशियाँ …………………..
तूने ही मुझे जीने की,
नई राह बतायी है,
तू ही नींद में मेरे लिये,
सुबह की अंगड़ाई है,
खुशियाँ …………………..
तू ने ही सिखाया है हँसना,
मुझे  ज़िंदगी में,
मैं तलाश करता हूँ तुझे,
खुदा की बंदगी में,
जिंदगी जलती थी मेरी,
कराहते गमों में,
तेरी याद कंपकपाती सर्दी में,
मेरे लिए गरम रजाई है,
खुशियाँ ……………………
मैं ख्वाब भी अब,
तेरे ही देखता हूं,
तेरे ही साथ जीने के,
सपने संजोता हूं,
तू जब नहीं होती साथ मेरे,
तो होती मेरी खुद से लड़ाई है,
तेरे आने से ही,
दूर हुई मेरी तन्हाई है,
खुशियाँ ………………….
तूने ही बताए हैं मुझे,
ज़िन्दगी के मायने,
तुझसे मुलाकात के बाद,
ज़िन्दगी देने लगी हे नजराने,
तूने ही मेरी रोती हुई,
ज़िन्दगी हंसायी है,
खुशियाँ ……………………..

कयामत तुम ………….

कयामत तुम,
ढा रही हो मुझ पर,
तीर तुम चला रही हो,
मेरे दिल पर,
मैं घायल हो चूका हूं,
तेरे नैनों के तीरो से,
तुम शबनम की बूँद हो,
मेरे मन के,
प्यारे फूलों पर,
कयामत तुम ……………….
तुम हसीनाओ में अफजल हो,
तुम मेरी जिंदगी का,
खूब-सूरत पल हो,
रातो में सो नहीं पाता मैं,
और नींद अगर आती है,
तो सपनो में साया तुम्हारा,
रहता है मुझ पर,
कयामत तुम …………………
अजीब इत्तेफ़ाक़ है,
तुम्हारा मिलना मुझसे,
तुम्हे जान-ने लगा हूं,
मैं करीब से,
मैं चाहता हूं,
तुम्हे पूरे दिल से,
तुम फूलो का,
एहसास हो मुझ पर,
बिन सावन के,
बारिश की बोछार,
करा रही हो मुझ पर,
कयामत तुम ……………..
तुम्हारे हसीं बालों की,
छाँव में,
रात का एहसास,
होता है मुझे,
ख्यालो में भी,
याद रखता हूं मैं तुझे,
तुम आ जाओ मेरे करीब,
और बह जाओ,
नदी की तरह मुझ पर,
कयामत तुम ………………

जिसे मेरी ……………

जिसे मेरी परवाह नहीं,
मुझे भी उस की परवाह नहीं,
जिसने मुझे दर्द दिया,
मुझे भी उसकी आह,
महसूस होती नहीं,
जो लोग मेरी सुनते नहीं,
मुझे भी उनकी आवाज,
सुनाई देती नहीं,
जिसे मेरी ………………
जिन्हें मेरी खुशी में,
महसूस होती है खुशी,
मैं भी उनकी खुशी में,
हिस्सेदार होता हूं,
जिन्हे मेरी खुशियों की फिक्र नहीं,
मुझे भी उन की फिक्र नहीं
जिसे मेरी …………………..
जो प्यार करते हैं मुझ से,
मैं भी उन को,
अपने प्यार की बारिश में,
सरोबार करता हूं,
इस दुनिया में बस,
मतलब के लिये,
साथ रहते हैं लोग,
जो मतलब पूरा करने के लिये,
साथ रहते हैं मेरे,
उनके साथ मैं रहता नहीं,
जिसे मेरी ……………….
जो बुरे वक़्त में,
मेरे साथ हैं,
मैं क्यों छोड़ू उन्हें तन्हा,
मैं तो हूं उन की,
ज़िंदगी का एक प्यार सा लम्हा,
जो बुरे वक़्त में,
साथ नहीं मेरे,
मैं भी उन के साथ नहीं,
जिसे मेरी परवाह नहीं ……….

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