दिल का हाल ……………

दिल का हाल,
अजब हुआ,
जब से प्यार,
इस दर्द का,
सबब हुआ,
मेरा मन,
है खुशहाल,
जब से तेरा,
इस दिल में,
बसर हुआ,
दिल का हाल …………………
तेरी तरफ जो दैखा,
तो तेरे नशीले नैनों का,
असर हुआ,
निकल पड़ा दिल,
तेरी राह पर,
साथ तेरे चलने से,
आसान  जिन्दगी का,
सफर हुआ,
दिल का हाल …………………
चले जो कदम तेरे,
महफिल में मेरे मन की,
तो हर तोहफा,
तुम पर नजर हुआ,
दिल का हाल ………………….

पास हैं ………………

पास हैं,
फिर भी दरम्यान,
दूरी है,
गम नहीं है कुछ,
खुशी भी नहीं है,
यही तो दिलों की,
मजबूरी है,
पास हैं ………………………
ज़िन्दगी की नयी,
शुरुअात तो की है,
जमाने को दिखाते हैं,
एक दुसरे का,
फिर भी हमारी,
ज़िन्दगियां अधूरी है,
पास हैं ………………………
तेरी जिन्दगी में,
था खालीपन,
मेरी जिन्दगी में भी,
था सन्नाटा,
हम नें तो बस,
एक दूजे की,
ज़िन्दगी में,
खाली जगह,
कुछ पूरी की है,
पास हैं ……………………..

खाली खाली …………..

खाली खाली दिल से,
क्या करुं बात,
दिल जब होता है भरा,
तो होती है,
आँखो से बरसात,
दिन गुजर गया,
हो गयी है शाम,
आज कोई हमसफर,
नहीं है साथ,
खाली खाली …………………
ढूंढता फिरता हूँ,
दर-ब-दर बस,
तेरी साँसों की खुशबू,
दिल में अब कुछ,
ना रही आरज़ू,
तन्हाइयां ही लगती है,
अब मेरे हाथ,
खाली खाली,
बिन तेरे कहीं लगता,
नही मेरा मन,
याद में तेरी,
आँखों से बरसता,
है सावन,
काबू में नहीं है,
मेरे जज़्बात,
खाली खाली …………………..

ज़िन्दगी की पहली कमाई …………….

ज़िन्दगी की पहली कमाई,
आज हाथ में आई है,
ये ग़मगीन ज़िंदगी,
फिर से मुस्कुराई है,
बे-रोजगारी के,
अँधेरे से हट के,
ये ज़िन्दगी,
नया सवेरा लायी है,
ज़िन्दगी की पहली कमाई …………….
दुनिया वाले कहते थे,
नौकरी कैसे करेगा तू,
पर आज दुनिया को भी,
नौकरी कर के बतायी है,
दुनिया की सारी खुशियां,
आज दिल में समाई है,
ज़िन्दगी की पहली कमाई …………….
बिन कमाई के तो,
जमाने में,
होती जग हंसाई है,
हाथ में कोई काम न हो,
तो ज़माना भी,
करता रुस्वाई है,
पर आज तो,
खुशियो की दौलत,
दिल के दर पर आई है,
ज़िन्दगी की पहली कमाई …………….
खुशियो के बादल भी,
रुठे हुए थे पहले,
हर पल मैंने,
खुद से की लड़ाई है,
ज़िन्दगी की बंजर मिट्टी में,
आज हरी फसल लहलहाई है,
ज़िन्दगी की पहली कमाई …………….

ओ माँ ………..

सिर पर मेरे,
जो तेरा हाथ है,
मुझे लगे हर पल,
खुदा मेरे साथ है,
तेरे आँचल जैसा,
साथ है कहाँ,
एक तू ही है,
ओ माँ ……………………
मैं इस दुनिया में,
कुछ न जानता हूं,
छोटी सी बात से ही,
परेशान हो जाता हूं,
छोटे से घर में,
तू ही है,
मेरा सारा जहाँ,
ओ ‘माँ’ ………………………
तेरे पैरो में है ‘जन्नत’,
तेरी दुआओं से है पूरी,
मेरी हर मन्नत,
तेरे प्यार का,
मैं क्या करूँ बयान,
ओ ‘माँ’ ……………………….

तुमसे ही ………….

तुमसे ही मेरी सुबह,
तुमसे ही हर शाम है,
तेरे चेहरे को पढ़ कर,
ऐसा लगा जैसे,
तुझ में ही,
गीता और कुरान है,
इतना पाक है,
प्यार तेरा मेरा,
कि मुझे होता,
खुद पर गुमान है,
तुमसे ही ……………………..
देख लिया सारा जहाँ,
पर पाया तुमसे ही,
जमीन और आसमान है,
तू मेरी शोहरत,
तू मेरी शान है,
तुमसे ही जिन्दगी की,
हर राह आसान है,
तुमसे ही ……………………
दिन में है चैन,
शब में हे सुकून,
तुमसे ही जिन्दगी में,
आराम है,
तुमसे ही ……………………..

देखकर तुझे ………

देखकर तुझे,
हाल-ए-दिल,
ऐसा हुआ,
कि हर जगह,
बस तू ही,
दिखती है,
दिल की मजबूरी,
ऐसी है,
कि कलम भी मेरी,
हर दफा,
तेरा ही नाम,
लिखती है,
रातों में आंखो में,
नहीं है नींद,
बिन तेरे,
पलकें भी मेरी,
यादों में तेरी,
सारी रात जगती है,
देखकर तुझे……………
पहले था,
मन मेरा वीरान,
दिल की गलियों में भी,
था सुनसान,
आज दिल पर,
काबिज़ हुई,
तेरी बस्ती है,
देखकर तुझे……………….

सोचूं जो तुझे ……..

सोचूं जो तुझे,
तो मिलता है,
दिल को आराम,
देखकर तुझे,
खो जाता हूं,
सपनों में,
हो जाता हूं,
दुनिया से अनजान,
मन में हर वक्त,
रहती तू है,
खयालों में बस,
तेरी ही खुशबू है,
ये रिश्ता,
बे-नाम है जरूर,
पर कुछ तो है,
तेरे मेरे दरम्यान,
सोचूं जो तुझे……………
मुझ पर,
तेरे असर का,
क्या करूं बयान,
जुड़ गये हैं,
तेरे साथ,
मेरे सारे अरमान,
सोचूं जो तुझे………………

राही ………….

राही बन कर,
इन्सान दुनिया में,
दर-दर भटकता है,
इच्छा हो जिसे,
कुछ पाने की,
वो कहाँ ठहरता है,
न रहता है चैन,
राहों में,
न होता है आराम,
बाहों में,
असल सुकून तो,
मंजिल पाने के बाद ही,
मिलता है,
राही ………………….
आस के साथ,
वह करता है काम,
कभी मेहनत के मुताबिक,
नहीं मिलता उसे इनाम,
पर ये भी है सही,
कि मेहनत का फल,
देर से ही सही,
पर जरूर मिलता है,
राही …………………….

ये वीरानी ……….

ये वीरानी, ये वीरानी,
बिन तेरे है,
जीवन में वीरानी,
अलग थलग रहूं,
जमाने से,
सूनी सूनी सी है,
ज़िन्दगी की कहानी,
ये वीरानी ……………….
तन्हाई में,
ख्वाहिशें सारी अधूरी हैं,
हसरत तो मन में,
बस इतनी थी,
कि ज़िन्दगी,
साथ तेरे है बितानी,
ये वीरानी ……………………
भीड़ में रहूं,
फिर भी,
तन्हा महसूस करूं,
तन्हा रहूं,
तो महसूस तुझे करूं,
मेरी रग रग,
आज भी है,
तेरी दीवानी,
ये वीरानी …………………..

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