आशा …………….

आशा के पथ पर,
चला ले तू,
अपनी जिन्दगी का रथ,
जो चाहता है तू,
वो मिलेगा तुझे,
थोड़ा होसला तो रख,
सोचता है तू कभी,
कि हो जायेगा नाकाम,
क्यों करता है तू,
खुद पर इतना शक,
आशा ………………….
तू चलता रह,
यूं ना थक,
तू एक पल भी,
ना डिगाना,
राह से अपने पग,
मजबूर हो जायेगी,
मंजिल भी,
पायेगा तू वो,
जो है तेरा हक,
आशा ……………………..

वैसे तो ……………..

वैसे तो,
पूछती है तू मुझसे,
कि प्यार की हवा,
क्या होती है,
और मेरे सामने से,
गुजरते वक़्त,
चेहरे पर तेरे,
जो हया होती है,
इसी से तेरी,
मुझ से मोहब्बत,
बयान होती है,
वैसे तो ………………………….
महसूस करता हूं मैं,
कि गैर-मौजूदगी से मेरी,
परेशान तू होती है,
सामने मुझे पाते ही,
सपनों में तू खोती है,
देख लेता हूं,
छुप कर मैं,
कि ढूंढती है,
नज़रें तेरी मुझे वहाँ,
तू जहाँ होती है,
वैसे तो ……………………..

जुबान जो ……

जुबान जो कह न सकी,
वो आँखों ने कह दिया,
इजहार-ए-इश्क,
तेरा मुझसे,
सांसो ने कर दिया,
मेरी  बातो में जो,
तेरी खुशबु समायी,
तो मैं खुद को ही,
भूल गया,
जुबान जो ………………………
छिपते छिपाते,
एक झलक के लिये,
पीछा कर रहा हूं मैं तेरा,
तेरी नज़रें उठी जब,
होले से मेरी ओर,
तो दिल को मेरे,
ये जहां मिल गया,
जुबान जो ………………………
तेरे नैनों के,
सागर में डूबा,
जो मन मेरा,
तो दिल में,
प्यार का,
फूल खिल गया,
जुबान जो ………………………

हमें देखते ही ………………

हमें देखते ही वो,
अपनी राह बदल लेते हैं,
ऐसी भी क्या,
खता हुई हमसे,
कि वो अपनी अदा,
बदल देते हैं,
यूं तो हुई नहीं,
कोई गलती मुझसे,
फिर भी जाने क्यों वो,
वफा बदल लेते हैं,
हमें देखते ही …………………..
पहले मोहब्बत थी इतनी कि,
मैं हर मर्ज़ में,
बनता था शफा उनकी,
पर अब न जाने क्यों,
वो अपनी दवा बदल देते हैं,
हमें देखते ही …………………..
हम तो चले जा,
रहे थे तन्हा,
जिन्दगी के सफर में,
वो आई जिन्दगी में,
और जिन्दगी का,
रुख ही बदल दिया,
अब तो वो,
हमारी बात होते ही,
बात बदल देते हैं,
हमें देखते ही …………………..
परेशानियों में भी,
था मजा,
उसके साथ होने से,
अब तो वो अपना,
साथ ही बदल लेते हैं,
हमें देखते ही …………………..

हालात …………….

हालात,
सब सिखा देते हैं,
कभी खुद की,
कभी जमाने की,
औकात दिखा देते हैं,
ताकत होती है बहुत,
हालातों में,
कभी खुद की किस्मत,
खुद से ही,
लिखा देते हैं,
हालात …………………
हालातों से ही,
चलता है पता,
कौन अपना,
कौन पराया है,
इस बात से,
कोई मतलब नहीं,
किसने सही वक्त मे,
साथ निभाया है,
जो पहचान सके,
सही तरीके से,
जमाने को,
हालात वो निगाह देते हैं,
हालात ……………………

भाड़ में जाये ………….

भाड़ में जाये दुनिया,
ये दुनिया वाले,
करते हैं,
फालतू की बतियां,
ignore कर देता हूं,
दुनिया की बातों को,
इस लिये हैं,
जेब में मेरी,
सारी खुशियां,
भाड़ में जाये ………….
जमाने की तो,
आदत ही है,
रोने की,
सोचता नहीं.
जमाने के बारे में ज्यादा,
बावजह चलती रहती है,
ज़िन्दगी में मेरी,
खुशी की हसियां,
भाड़ में जाये ……………
रूकता नहीं,
किसी के रोकने से,
थमता नहीं,
किसी के सोचने से,
चलता रहता है,
ज़िन्दगी का पहिया,
भाड़ में जाये ………………

कभी शोहरत ……………

कभी शोहरत,
कभी नफरत मिलती है,
जमाने में,
फिर भी खो जाना,
अच्छा लगता है,
ज़िन्दगी के फसाने में,
रोने की हैं,
हजार वजहें,
फिर भी कभी,
मुस्कुराने का मौका,
ढूँढ ही लेता हूं,
किसी बहाने में,
कभी शोहरत ………………….
दुनिया नहीं है पीछे,
किसी गमगीन को,
सताने में,
गम भुलाने के लिये,
कभी जाम,
छलका ही लेता हूं,
दुनिया के किसी,
मय-खाने में,
कभी शोहरत ………………….

अच्छे अच्छों को ……..

अच्छे अच्छों को,
अपनों के लिये,
तरसते देखा है,
मत कर गुरूर,
खुद पर ऐ नादान,
दिन में सबके साथ,
हँसने वालों को भी,
शाम को अकेले में,
रोते देखा है,
अच्छे अच्छों को ……..
कभी खामोशियां,
सच्ची लगती है,
कभी शोर भी,
झूठा लगता है,
जो बरसते नहीं,
उन बादलों को भी,
गरजते देखा है,
अच्छे अच्छों को ………
मदमस्त थे,
जो जीव समन्दर में,
एक पल में ही,
उन्हें किनारे पर,
तड़पते देखा है,
अच्छे अच्छों को ……….

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