कमबख्त मेरा दिल भी ………….

कमबख्त मेरा दिल भी,
कितना सयाना है,
ये हर रोज ढूंढता,
तुम से मिलने का,
बहाना है,
तुम्हें सामने देखते ही,
मन में गूंजता,
प्यार का तराना है,
कमबख्त …………………….
मैं पूछता हूं,
कभी खुद से ही,
कि क्या है ज़िन्दगी?
दिल मेरा बोलता है,
ज़िन्दगी प्यार का ही,
फसाना है,
कमबख्त …………………….
सवाल है मेरा दिल से,
ये क्या नयी,
आफत ले ली तुने,
किसी महफ़िल से,
दिल का कहना है,
प्यार का रोग,
दिल के लिये,
बहुत पुराना है,
कमबख्त …………………….

वक़्त ………………

वक्त़ निकल जाता है,
पर निशान,
छोड़ जाता है,
एक छोटा सा फैसला ही,
ज़िन्दगी को,
एक अलग राह पर,
मोड़ जाता है,
ज़िन्दगी में हर दिन,
कुछ होती हे शर्तें,
कभी चलते चलते ही,
कुछ लोगों से,
रिश्ता जुड़ जाता है,
वक़्त ……………………….
वक्त़ के साथ,
ज़िन्दगी में कुछ लोग,
आगे बढ़ जाते हैं,
कुछ पीछे,
छूट जाते हैं,
एेसे दौर में,
कुछ लोग,
अकेले रह जाते हैं,
पर जीवन रूकता,
कहां है,
ये तो चलता जाता है,
वक्त़ ……………………….

कल का सूरज …………….

कल का सूरज,
एक नयी रौशनी लेकर अायेगा,
उम्मीद है कि,
एक नयी किरण,
दिल में जगायेगा,
ना-उम्मीदों को पीछे छोड़,
उम्मीद की एक लौ,
मन में जलायेगा,
कल का सूरज …………………….
आने वाला कल,
दु:खों के पहाड़ों को तोड़कर,
नीला आसमान दिखायेगा,
कल का दिन,
जीवन में,
एक नयी उमंग लायेगा,
कल का सूरज …………………….
इस सफर में वैसे तो,
अकेले ही चले हैं,
पर उम्मीद है,
कल इस सफर में,
कारवां जुड़ जायेगा,
कल का सूरज …………………….
उम्मीद है कल,
एक नया सवेरा आयेगा,
गम के अंधेरों को,
दूर भगायेगा,
आज तो आसमान में,
काले बादल हैं,
मुझ पर ना-उम्मीदों का साया है,
उम्मीद है, कल आासमान,
उम्मीद की बारिशें बरसायेगा,
कल का सूरज ……………………..

लहरों सा ……… जीवन

लहरों सा है जीवन,
कभी तूफान,
कभी शांति,
कभी है किसी के लिए तड़पन,
है मिजाज़ भी,
अलग ही ज़िन्दगी का,
कभी बहुत हल्का,
महसूस करता हूं,
कभी उलझ जाता है,
किसी बात में मन,
लहरों सा ………………………़
ज़िन्दगी एक दौर है,
कभी खुशी,
कभी गम का,
कभी उतार,
कभी चढ़ाव,
यही दस्तूर है जीवन का,
रहता नहीं,
एक जैसा वक़्त कभी,
मौसम कभी अच्छा रहता है,
कभी आँखों से,
बहता है सावन,
लहरों सा ……………………..

ऐ मन …………….

ऐ मन,
तू ज़िन्दगी को,
थोड़ा आराम दे,
झंझटों से निकल-कर,
परेशानियों को,
थोड़ विराम दे,
ना भटक तू,
दर-ब-दर,
होकर बद-हवास,
मंजिल की तलाश में,
कुछ पल के लिये,
दिल में तू,
सुकून की डोर बाँध दे,
ऐ मन ………………………
दो पल की,
है ज़िन्दगी,
इसे ख़ुशी से,
बिता ले,
क्यों पड़ता है,
तू फालतू की बातो में,
तू जीवन से,
दु:खो को मिटा ले,
बस यही राज है,
खुशी से जीने का,
तू ये बात जान ले,
ऐ मन ………………………

ना है खोफ …………………..

ना है खौफ किसी का,
ना किसी बात का,
है डर,
खुदा की दुनिया में,
हूं एक मुसाफिर,
भटकता हूं दर-ब.-दर,
मुश्किलें कितनी भी आये,
चाहे तकलीफें आये ढेरों,
पर रुकता नहीं मैं,
करता रहता हूं सफर,
ना है खोफ …………………..
ना शिकवा है,
ना है शिकायत खुदा से,
दी उसी ने,
मुझे नयी ज़िंदगी,
कर के मुझे,
खुद से जुदा है,
लगा हुआ हूं,
खुद को ही,
पहचानने में,
और कर रहा हूं बसर,
ना है खोफ …………………….

क्यों मुझे ……………

क्यों मुझे,
तेरी हर गुस्ताखी भी,
मंजूर है,
तेरा नाम अब,
मेरे जिस्म की,
रग रग में,
मशहूर है,
एेसा होता न था,
पहले कभी,
शक होने लगा है,
मुझे खुद पर भी,
कि मेरे दिल में,
तेरा हिस्सा,
कुछ तो जरूर है,
क्यों मुझे …………………….
तेरी छोटी छोटी,
गलतियों पर,
कोई ध्यान नहीं,
आज कल मुझे,
तेरे अलावा,
कोई अरमान नहीं,
नजरअंदाज,
कर देता हूं,
मैं खुद को भी,
सामने तेरे,
क्यों दिल मेरा,
इतना मजबूर है,
क्यों मुझे …………………….

कभी …………………

कभी तकरार में भी,
प्यार होता है,
कभी इन्कार में भी,
इकरार होता है,
होती है मोहब्बत भी,
अजीब ही,
कभी फासलों से दिल,
बे-करार होता है,
कभी ……………………………
इश्क में बोलने की,
जरुरत नहीं,
मोहब्बत तो हो,
जाती है,
आंखों से ही बयान,
ये बातों की,
मोहताज नहीं,
कभी बिन बोले ही,
इश्क का इज़हार होता है,
कभी ……………………………
चाहें जिसे हम,
पूरे दिल से,
हम न मिले खुद से,
बिन उससे मिल के,
हर दिन मीठा,
उसका इंतज़ार होता है,
कभी ………………………….

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