ज़िन्दगी ………….. एक इम्तेहान

ज़िन्दगी एक इम्तेहान है,
यहाँ हर बार,
कसौटी पर खरा उतरना,
बड़ मुश्किल काम है,
पर हिम्मत से,
हर मुश्किल भी आसान है,
ज़िन्दगी ……………………….
हर कदम पर है दिक्कतें,
हर डगर पर है रुकावटें,
काम अगर सच्चे,
मन से करो,
तो सब परेशानियां,
लगती बड़ी कामरान है,
ज़िन्दगी ……………………….
मिट्टी से बना है इन्सान,
मिट्टी में ही मिल जायेगा,
कुदरत के सामने,
इन्सान की औकात कुछ नहीं,
फिर भी इंसान समझता,
खुद को बड़ा धनवान है,
ज़िन्दगी ……………………….
नाम में क्या रखा है,
दुनिया में काम ही,
इन्सान की पहचान है,
ये बात जानते हुये भी,
इन्सान नाम के लिये,
करता खुद को परेशान है,
ज़िन्दगी ……………………….

कहीं तो ……………………….

कहीं तो होगी वो,
जो सपनों में,
हर पल साथ है,
ख्यालों में मेरे,
हाथो में जिसका,
हाथ है,
वो होगी कोई ‘परी’,
या कोई ‘नाजनीन’,
उसकी यादों से,
ज़िन्दगी में कुछ तो,
बात है,
कहीं तो ……………………..
सुबह उठता हूं तो,
आता है नज़र,
बस एक चेहरा,
शामें भी हो गयी है,
उस के नाम,
दिन बर्बाद है,
उस अनाम के लिये,
करवटें बदलती हुई,
गुजरती मेरी,
हर रात है,
कहीं तो ……………………….

तू मेरी ………

तू मेरी मंजिल,
तू ही रास्ता है,
बस एक मुलाक़ात में ही,
हो गया,
मेरा तुमसे वास्ता है,
तुमने जो,
एक लफ्ज़ कहा,
तो लिख ली मैंने,
मन में मेरे,
प्यार की दास्तान है,
तू मेरी …………………………
हर पल में,
यादों में तेरी,
गुम रहूं,
पर हाल-ए-दिल,
तुमसे कैसे कहूं,
देखा है जब से तुम्हें,
दिल मेरा लापता है,
रहता हूं खोया खोया,
तू ही मेरा पता है,
तू मेरी …………………………

तेरे नैनों में ………………………

तेरे नैनों में,
जो नशा है,
पीकर ये जाम,
आया ज़िन्दगी में,
मजा है,
सबूत मेरी मोहब्बत का,
तू खुद में ही,
देख ले,
मेरा दिल तुझ में ही,
बसा है,
तेरे नैनों में ………………………
और क्या सोचूं
मैं तेरे अलावा,
किसी ओर बात की,
दिल को,
फुर्सत कहाँ है,
मन मेरा,
तेरे प्यार में,
फंसा है,
तेरे नैनों में ………………………
कुछ इस तरह,
बहका हूं तेरे,
प्यार में,
कि हर जगह,
तू आती है नजर,
आसमान में भी,
तू चांद,
तू कहकशां है,
तेरे नैनों में ……………………….

शहरों में ……………………..

शहरों में,
इंडिया देखता है तू,
कुछ वक़्त निकाल कर,
गांवों में हिन्दुस्तान भी,
देख ले,
आसमान की सैर तो,
बहुत की तुने,
कुछ पल निकाल कर,
गांवो के खलिहान भी,
देख ले,
शहरों में ………………………..
मर रही हे फसलें,
सूखे से,
मर रहा है,
किसान भी,
कभी पग-डंडी पर,
चल कर उस के,
मकान भी देख ले,
शहरों में ………………………..
शोपिंग मॉल्स में घूमता है,
आज कल तू,
कभी नुक्कड़ पर जाकर,
एक बेबस की,
दुकान भी देख ले,
शहरों में ………………………..

तू मेरा मजहब …………..

तू मेरा मजहब,
तू ही ईमान है,
तेरी बाहों में,
मैंनें पाया,
सारा जहां है,
मेरी दुनिया तुझ में ही,
हैै बसी,
तेरे अलावा हर बात,
मेरे लिए हराम है,
तू मेरा मजहब ………………..
हर खुशी,
हर गम में,
तू मेरे साथ है,
फिर किसी भी हालात से,
डरने की क्या बात है,
सब कुछ है,
तू मेरे लिये,
मुझ पर तू,
खुदा का एहसान है,
तू मेरा मजहब ………………..
रहता हूं खोया सा,
दिल मेरा तुझ में ही,
है बसा,
मन भी दुनिया से,
अनजान है,
तू मेरा मजहब ………………..

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