मन की बात …………………..

मन की बात,
मन में ही,
रह गयी,
दर्द-ए-दिल,
बयान कर न सके,
और सांस थम गयी,
महसूस कर रहा हूं,
मैं सोकर भी,
तेरी आँखों में नमी,
पर अब,
उस दिन के लिये,
क्या रोना,
जब शाम ही,
ढल गयी,
मन की बात ……………………….
अब क्या गिला करूं,
कि कह न सका,
हाल-ए-दिल तुमसे,
जब साँसे ही,
इस दुनिया को,
अलविदा कह गयी,
मन की बात …………………….

तू मेरे लिये ………………

तू मेरे लिये,
कुछ खास है,
तेरी बातें मेरे लिये,
खुशनुमा एहसास है,
तेरी बातों को ओढ़ कर,
मिजाज बदला है,
तू वो लिबास है,
तू मेरे लिये ……………….
तुमसे मुलाक़ात के बाद,
ज़िन्दगी में हालात बदले हैं,
दूर हुए जीवन से,
झमेले हैं,
तू मुश्किल की घड़ी में,
एक आस है,
तू मेरे लिये …………………..
कहते हैं,
मोहब्बत भी तो,
इबादत है,
तेरी चाहत मेरे दिल की,
जरुरत है,
तू प्रार्थना, तू दुआ,
तू ही अरदास है,
तू मेरे लिये ……………………

क्या करूं ……………………….

क्या करूं,
कुछ समझ नहीं आता,
बिन तेरे ये मन,
कहीं लग नहीं पाता,
धड़कन बढ़ जाती है,
देखते ही तुझे,
ऐसा लगता है जैसे,
तेरे मेरे बीच,
जुड़ गया है कोई नाता,
क्या करूं ……………………….
तेरे खयालों में,
ना खाने का,
मन होता है,
न कुछ काम करने का,
मुझ में अब,
तू ही बसी है,
मुझे अब कुछ,
नहीं भाता,
दिल मेरा तुमने,
कब लिया चुरा,
मुझे खुद को,
नहीं पता,
क्या करूं ……………………….

तेरा सपना ……………………..

तेरा सपना,
जब आता है,
रात यूं ही,
गुजर जाती है,
लगता है,
तू होती है,
मेरे करीब,
तो अंगड़ाई भी,
पास आकर,
मुकर जाती है,
तेरा सपना ………………………
जो खयालों में,
सहलाती है तू,
मुंह को मेरे,
तो खामोशियों में,
तेरी बातें होले होले,
नींदो में भी,
महसूस हो जाती है,
तेरा सपना ………………………
तू ही मेरी,
ज़िन्दगी की धुरी है,
जुबान में तेरी,
जैसे बांसुरी है,
ख्वाबों में तेरी आवाज,
मीठा राग सुनाती है,
तेरा सपना ………………………

कुछ कहना है ……………………

कुछ कहना है तुमसे,
फिर भी,
चुप रह जाता हूं,
सामने तेरे आते ही मैं,
सुनहरे ख्वाबों में,
खो जाता हूं,
तुमसे मिलने की,
ख्वाहिश होती है बार बार,
फिर तुम्हें,
देखते ही मै,
खुद को भूल जाता हूं,
कुछ कहना है …………………
पागलपन कुछ ऐसा है,
तुमसे मोहब्बत का,
कि कहीं भी जाऊं,
तो आती है तू नजर,
और तेरी एक,
झलक मिलते ही,
मैं प्यार के,
सागर में डूब जाता हूं,
कुछ कहना है ……………………

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