बिन तेरे ……………………..

बिन तेरे ज़िन्दगी में,
अंधेरे हैं,
जाने कहाँ खो गये,
खुशियों के सवेरे हैं,
दिखाई देती नहीं,
ज़िन्दगी की मंजिल तेरे बिन,
अब बस तेरी राह,
ताकती रहती,
मेरी नज़रें हैं,
बिन तेरे ……………………..
कहा जाऊं,
तुझे भुला कर,
हर जगह तू ही,
आती है नज़र,
आंखो में मेरी,
कई लम्हे तेरे हैं,
यादों में मेरी,
तेरे ही बसेरे हैं,
बिन तेरे ……………………..
अकेला ही चल रहा हूं,
ज़िन्दगी की राहों में,
भटकता फिर रहा हूँ,
जीवन के किनारों में,
ऐसा लगता है जैसे,
खो गये ज़िन्दगी के,
सहारे हैं,
बिन तेरे ……………………..

मन की बात …………………..

मन की बात,
मन में ही,
रह गयी,
दर्द-ए-दिल,
बयान कर न सके,
और सांस थम गयी,
महसूस कर रहा हूं,
मैं सोकर भी,
तेरी आँखों में नमी,
पर अब,
उस दिन के लिये,
क्या रोना,
जब शाम ही,
ढल गयी,
मन की बात ……………………….
अब क्या गिला करूं,
कि कह न सका,
हाल-ए-दिल तुमसे,
जब साँसे ही,
इस दुनिया को,
अलविदा कह गयी,
मन की बात …………………….

कुछ बातें ……………

कुछ बातें तू भूल जाये,
कुछ बातें मुझे भी,
ना याद रहे,
तो ये दूरी,
यूं ही मिट जाये,
कुछ बातें ………………………..
कुछ साथ बिताये हुए पल,
तेरे जहन में हो,
कुछ यादें मेरे,
मन में हो,
तो ये खाई,
यूं ही पट जाये,
कुछ बातें ………………………..
कुछ भरोसा,
तेरे नयन में हो,
कुछ गलत-फहमियां,
मुझ में ही दफन हो,
तो मेरी और तेरी,
जिन्दगी की राहें,
फिर से मिल जाये,
कुछ बातें ………………………..
कुछ कदम,
तू बढ़ाये मेरी तरफ,
चलूं थोड़ा मैं भी,
तेरी तरफ,
तो ये फासले,
यूं ही मिट जाये,
कुछ बातें ………………………..

जो तू न रही ……………..

जो तू न रही,
ज़िन्दगी में मेरी,
बाकी क्या रहा,
तू ही चलती थी,
साथ हरदम मेरे,
बिन तेरे अब,
अपने साये पर भी,
भरोसा न रहा,
जो तू न रही ……………………..
जुदाई में तेरी,
बद-हवासी एेसी है,
कि अंदर ही अंदर,
घुट रहा हूँ,
दिल रो रहा है,
बस आँखों से,
एक कतरा,
अांसू का न बहा,
जो तू न रही ……………………..
हालत मेरी,
बस मैं ही,
जानता हूं,
तन्हाई में मैंने,
क्या कुछ न सहा,
जो तू न रही ……………………

चले गये ……..

चले गए वो तो,
अब क्यों आये हो,
तुम कहने को ही,
हो अपने,
यूं तो पराये हो,
जब मुश्किल थी,
तब साथ,
न दिया किसी ने,
न ली किसी ने खबर,
हालात हो गए थे,
जब ज़िन्दगी के,
बद से बदतर,
तब थे कहां,
अब क्या यहां,
मुंह दिखाने आये हो,
चले गये वो तो ……………………
पहले नहीं था,
ज्यादा पता मुझे,
जमाने के बारे में,
तुम ही मुझे,
दुनिया का सही रूप,
दिखाये हो,
चले गये वो तो ……………………

मौत तो ……………..

मौत तो नाम से ही,
बदनाम है,
तकलीफ तो ज़िन्दगी ही,
ज्यादा देती है,
कभी ज़िन्दगी ‘जान’ को ही,
छीन लेती है,
क्या करे ऐसी ज़िन्दगी जीकर,
ज़िन्दगी बा-मुशक्कत,
कैद की सजा देती है,
मौत तो …………………….
बिन हमसफ़र के,
क्या मतलब है ज़िन्दगी का,
अंदाज क्या लगायें,
बिन साये के,
ज़िन्दगी में संजीदगी का,
अकेलेपन में जिंदगी,
हर कदम पर,
इम्तेहान लेती है,
मौत तो …………………….
मौत हो जाए मेरी,
तो कोई गम नहीं,
ज़िन्दगी में उस के बिन,
कोई मरहम भी नहीं,
बुला ले खुदा,
मुझे उस के पास,
यादें उस की,
दर्द ज्यादा देती है,
मौत तो ……………………….

हमें देखते ही ………………

हमें देखते ही वो,
अपनी राह बदल लेते हैं,
ऐसी भी क्या,
खता हुई हमसे,
कि वो अपनी अदा,
बदल देते हैं,
यूं तो हुई नहीं,
कोई गलती मुझसे,
फिर भी जाने क्यों वो,
वफा बदल लेते हैं,
हमें देखते ही …………………..
पहले मोहब्बत थी इतनी कि,
मैं हर मर्ज़ में,
बनता था शफा उनकी,
पर अब न जाने क्यों,
वो अपनी दवा बदल देते हैं,
हमें देखते ही …………………..
हम तो चले जा,
रहे थे तन्हा,
जिन्दगी के सफर में,
वो आई जिन्दगी में,
और जिन्दगी का,
रुख ही बदल दिया,
अब तो वो,
हमारी बात होते ही,
बात बदल देते हैं,
हमें देखते ही …………………..
परेशानियों में भी,
था मजा,
उसके साथ होने से,
अब तो वो अपना,
साथ ही बदल लेते हैं,
हमें देखते ही …………………..

चल रहा हूं ……………….

चल रहा हूं,
वक्त के साथ,
पर मेरी दुनिया,
वहीं की वहीं है,
जी तो रहा हूं,
गम बस इतना है,
कि साथ तू नहीं है,
चल रहा हूं ………………
खो दिया दिल,
साथ तेरे ही,
अब ज़िस्म में,
बस सांसे ही,
बाकी रही है,
चल रहा हूं ……………….
सोचता हूं कि,
आयेगी तू वापस कभी,
इन्तज़ार करता रहता हूं,
मैं तेरा,
पर घड़ी तो है वहीं,
जी तो रहा हूं,
तेरे बिन,
बस जीने की,
ख्वाहिश नहीं है,
चल रहा हूं …………………

पास हैं ………………

पास हैं,
फिर भी दरम्यान,
दूरी है,
गम नहीं है कुछ,
खुशी भी नहीं है,
यही तो दिलों की,
मजबूरी है,
पास हैं ………………………
ज़िन्दगी की नयी,
शुरुअात तो की है,
जमाने को दिखाते हैं,
एक दुसरे का,
फिर भी हमारी,
ज़िन्दगियां अधूरी है,
पास हैं ………………………
तेरी जिन्दगी में,
था खालीपन,
मेरी जिन्दगी में भी,
था सन्नाटा,
हम नें तो बस,
एक दूजे की,
ज़िन्दगी में,
खाली जगह,
कुछ पूरी की है,
पास हैं ……………………..

खाली खाली …………..

खाली खाली दिल से,
क्या करुं बात,
दिल जब होता है भरा,
तो होती है,
आँखो से बरसात,
दिन गुजर गया,
हो गयी है शाम,
आज कोई हमसफर,
नहीं है साथ,
खाली खाली …………………
ढूंढता फिरता हूँ,
दर-ब-दर बस,
तेरी साँसों की खुशबू,
दिल में अब कुछ,
ना रही आरज़ू,
तन्हाइयां ही लगती है,
अब मेरे हाथ,
खाली खाली,
बिन तेरे कहीं लगता,
नही मेरा मन,
याद में तेरी,
आँखों से बरसता,
है सावन,
काबू में नहीं है,
मेरे जज़्बात,
खाली खाली …………………..

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