ये जीत …………….

ये गीत मैंने दिल्ली में आम आदमी पार्टी की जीत पर लिखा है।

ये जीत कोई तुक्का नहीं,
विरोधियों को जोरदार मुक्का है,
आम आदमी ने जो,
जादु चलाया,
तो चल गया,
पार्टी का सिक्का है,
सरकार पार्टी की नहीं,
ये आम आदमी की सत्ता है,
ये जीत ………………………
पिछली बार जो,
गलती की थी,
वो नहीं करेंगे अब,
सबको लेकर साथ,
चलेंगे अब,
देंगे जनता को,
भ्रष्टचार मुक्त सरकार,
ये सोच सिर्फ मेरी नहीं,
ये विचार सबका है,
ये जीत ……………………
लेकर चलना है,
सबको एक आस,
करेंगे हर गाँव का विकास,
ये कोई खोखली बात नहीं,
ये हमारी राजनीति,
का मुद्दा है,
ये जीत ……………………..

माना कि ……………..

माना की कानून,
अंधा होता है,
पर अदालत में,
गुनाहों का धंधा होता है,
बच जाता है,
कोई सौ गलत काम,
कर के भी,
और कोई पाक इन्सान,
साबित गन्दा होता है,
माना कि …………………
कभी कानून किसी,
अमीर के सामने,
झुका होता है,
कानून के फेर में,
कभी किसी गरीब का,
काम रुका होता है,
गलत कुछ भी नहीं,
इस बात में,
कि कभी कहीं,
कानून के नाम पर,
चंदा होता है,
माना कि ……………………..
हमारा बस चले तो,
बदल दे ऐसे कानून को,
पूरा कर ही दें,
अपने इस जूनून को,
पर भरोसा है हमें,
कि देश की थानों में,
बेठा कोई न कोई,
इमानदार बंदा होता है,
माना कि ……………………..

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