खुदा ने …………………………

खुदा ने बड़ी फुर्सत से,
तुझे बनाया है,
तेरे काले बाल,
जैसे सावन के,
बादलों की छाया है,
आंखो में तेरी,
मैं डूब जाता हूं,
जैसे ये मय का प्याला है,
खुदा ने …………………………
आफताब भी जैसे तेरा,
एक सरमाया है,
माहताब भी जैसे तेरी,
आंख का एक तारा है,
तेरे बालों पर,
पानी की एक बूंद,
जैसे समन्दर का किनारा है,
खुदा ने …………………………
तू चलती है ऐसे,
जैसे बहती जल की धारा है,
तेरे हुस्न की चमक,
जैसे कोहिनूर का हीरा है,
खुदा ने …………………………

तू मेरी ………..

तू मेरी ज़िन्दगी का,
हर पल है,
तुमसे ही आज,
तू ही मेरा कल है,
मैं हूं समन्दर,
तू जल है,
ज़िन्दगी नहीं है आसान,
तेरे बिन,
मेरी ज़िन्दगी है मुश्किल,
तू उस का हल है,
तू मेरी ……………………..
ज़िन्दगी है सागर का साज,
मैं हूं तैरता जहाज,
तू साहिल है,
तेरी बातें,
हिलोरें मारती लहर है,
तू करती कल-कल है,
तू मेरी ……………………..
ज़िन्दगी में मेरी,
तूने मचायी हल-चल है,
तेरे साथ ही,
मेरा जीवन सफल है,
तू मेरी ……………………..

अच्छे अच्छों को ……..

अच्छे अच्छों को,
अपनों के लिये,
तरसते देखा है,
मत कर गुरूर,
खुद पर ऐ नादान,
दिन में सबके साथ,
हँसने वालों को भी,
शाम को अकेले में,
रोते देखा है,
अच्छे अच्छों को ……..
कभी खामोशियां,
सच्ची लगती है,
कभी शोर भी,
झूठा लगता है,
जो बरसते नहीं,
उन बादलों को भी,
गरजते देखा है,
अच्छे अच्छों को ………
मदमस्त थे,
जो जीव समन्दर में,
एक पल में ही,
उन्हें किनारे पर,
तड़पते देखा है,
अच्छे अच्छों को ……….

ये मन ……………..

ये मन है,
या समन्दर है,
कई बातें दबी,
इसके अन्दर है,
होती है बातें भी,
मन में,
अजीब ही,
कभी होती है शांति,
कभी मच जाता,
बवन्डर है,
ये मन ……………..
समझ नहीं आती,
बातें इसकी,
कभी उड़ता है,
आसमानों में,
कभी फैलाता है,
उतने ही पाँव,
जितनी चादर है,
ये मन ………………
कभी सहेजता नहीं,
अनमोल चीजों को भी,
कभी करता,
छोटी चीजो की,
कद्र है,
ये मन ……………….

तुम को ……………

तुम को जब से,
देखा है,
खुद को मैं,
भूल गया हूँ,
तेरे साथ हर पल,
खुद को महसूस,
करने लगा हूँ,
तुम सी कोई,
देखी न थी पहले,
तुम से मिलने के बाद,
ऐसा लगा जैसे,
मैं दुनिया में,
नया नया हूँ,
तुम को ……………………
बस ऐसे ही,
नदी समझ कर,
तेरे दिल के,
घाट पर उतरा था,
वापस न निकल पाया हूँ,
मैं तेरे दिल के,
समन्दर में,
डूब गया हूँ,
तुम को ………………………..

प्यार के कीड़े ने ………….

प्यार के कीड़े ने,
इस दिल पर,
काट खाया है,
आज तुमने सारी रात,
मुझे नींद से उठाकर,
अपनी यादों की,
आग में जलाया है,
दोस्ती के पानी में,
मस्ती करते हुये,
मैंने अपने आप को,
प्यार की नदी में बहाया है,
प्यार के कीड़े ने ……………….
तुम्हें देखते ही मैंने,
इस दिल में प्यार का,
जहाँ बसाया है,
ये दिल आज प्यार का,
समन्दर में नहाया है,
तु मेरे दिल में,
खुशबू की तरह समाया है,
प्यार के कीड़े ने ……………….
ये दिल हो चुका है,
प्यार के घोड़े पर सवार,
तुमने दिल को,
कर दिया है बीमार,
मोहब्बत इस हसीन दिल के,
ऐहसासो की दवाइयां है,
प्यार के कीड़े ने …………………
मेरे दिल के मौसम में,
आई हे तेरी ही बहार,
चले हम जमाने से कहीं दूर,
और करें एक दूजे से प्यार,
रोते हुए दिल को,
आज तुमने हँसाया है,
प्यार के कीड़े ने ………………..

कभी ………………

कभी खुद के ऊपर,
हँसना भी बेहतर होता है,
कभी मीठे पानी से,
बेहतर समन्दर होता है,
खुद को हार कर,
दिलों को जीतने वाला ही,
सही मायनों में,
सिकन्दर होता है,
कभी ………………………
दुनिया में दुःख हैं,
तो सुख भी कम नहीं,
आज से बेहतर,
कोई और वक़्त नहीं,
हवाऐं चलती हैं,
जिंदगी में कई तरह की,
कभी धीमी हवाओं से बेहतर,
बवंडर होता है,
कभी ……………………….
इन्सान कभी सबको लेकर,
चलता है साथ,
कभी खा जाता है,
अपनों से ही मात,
होता नहीं कभी कभी,
मेहनत के मुताबिक़ काम,
कभी मेहनत से ऊपर,
मुकद्दर होता है,
कभी …………………………

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