तू मेरी ………..

तू मेरी ज़िन्दगी का,
हर पल है,
तुमसे ही आज,
तू ही मेरा कल है,
मैं हूं समन्दर,
तू जल है,
ज़िन्दगी नहीं है आसान,
तेरे बिन,
मेरी ज़िन्दगी है मुश्किल,
तू उस का हल है,
तू मेरी ……………………..
ज़िन्दगी है सागर का साज,
मैं हूं तैरता जहाज,
तू साहिल है,
तेरी बातें,
हिलोरें मारती लहर है,
तू करती कल-कल है,
तू मेरी ……………………..
ज़िन्दगी में मेरी,
तूने मचायी हल-चल है,
तेरे साथ ही,
मेरा जीवन सफल है,
तू मेरी ……………………..

कुछ कहना है ……………………

कुछ कहना है तुमसे,
फिर भी,
चुप रह जाता हूं,
सामने तेरे आते ही मैं,
सुनहरे ख्वाबों में,
खो जाता हूं,
तुमसे मिलने की,
ख्वाहिश होती है बार बार,
फिर तुम्हें,
देखते ही मै,
खुद को भूल जाता हूं,
कुछ कहना है …………………
पागलपन कुछ ऐसा है,
तुमसे मोहब्बत का,
कि कहीं भी जाऊं,
तो आती है तू नजर,
और तेरी एक,
झलक मिलते ही,
मैं प्यार के,
सागर में डूब जाता हूं,
कुछ कहना है ……………………

तुझे पाकर …..

तुझे पा कर,
जैसे जहां पाया है,
तेरे साथ गुजरा,
हर पल,
बड़ी मन्नतों के बाद,
कमाया है,
तू है खुशी,
मेरे लिये,
हर गम में भी,
सूरज की तपन के बीच,
मेरे साथ तू,
घना साया है,
तुझे पा कर …………..
भूल जाता हूं,
सब कुछ,
पास तेरे आकर,
मिल जाता हूं,
तुझमें ही,
बन के सागर,
तेरे साथ होकर,
मैंने खुद को,
गंवाया है,
तुझे पा कर …………….

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