तू मेरी ………..

तू मेरी ज़िन्दगी का,
हर पल है,
तुमसे ही आज,
तू ही मेरा कल है,
मैं हूं समन्दर,
तू जल है,
ज़िन्दगी नहीं है आसान,
तेरे बिन,
मेरी ज़िन्दगी है मुश्किल,
तू उस का हल है,
तू मेरी ……………………..
ज़िन्दगी है सागर का साज,
मैं हूं तैरता जहाज,
तू साहिल है,
तेरी बातें,
हिलोरें मारती लहर है,
तू करती कल-कल है,
तू मेरी ……………………..
ज़िन्दगी में मेरी,
तूने मचायी हल-चल है,
तेरे साथ ही,
मेरा जीवन सफल है,
तू मेरी ……………………..

तुम हो …………

तुम हो राह,
मेरी जिन्दगी की,
मंजिल की,
तुम ही हो मल्लिका,
मेरे दिल की,
तुम ने शान,
बढ़ा दी है,
दिल की महफ़िल की,
तुम हो ……………………
मुझे नहीं है जरूरत,
किसी बात की,
मुझे चाहत है,
बस तेरे साथ की,
मेरी जिन्दगी को,
जरुरत है बस,
तुम जैसे साहिल की,
तुम हो …………………..
तेरी यादें जन्नत का,
एहसास होती है,
तू हर जगह,
मेरे साथ होती है,
मुझे तेरी यादो में,
याद आती है बहार की,
तुम हो …………………..
बिन तेरे दिल मेरा,
परेशान हो जाता है,
तेरे साथ से,
मेरी जिन्दगी का सफर,
आसान हो जाता है,
तुम हो हमसफर,
मेरी जिन्दगी की,
तुम हो धड़कन,
मेरे दिल की,
तुम हो ……………………….

लापता …………….

लापता हो गया है मेरा दिल,
ढूँढने निकल पड़ा है मंजिल,
तेरी यादों के घेरे ने,
जकड़ रखा है मुझे,
इन यादों से निकलने में,
दिल को होती है,
बड़ी मुश्किल,
लापता ………………………
ज़िन्दगी की हिचकोले खाती,
डूबती हुई नाव,
ढूँढने लगी है साहिल,
अब ज़िंदगी के सफर पर,
तू मुझसे आकर कहीं मिल,
लापता ………………………….
दिल मेरा कहीं,
लगता ही नहीं,
दिल की बाते भी,
दिमाग के बस में है नहीं,
तु बस गयी है,
दिल में,
अजीब बातें होने लगी है,
दिल के साथ आज-कल,
लापता …………………………
अब ना दिल पर,
जोर है,
ना दिमाग पर काबू है मेरा,
मस्ती में खोया हुआ चलता हूँ,
तो लोग कहते हैं मुझे,
आवारा, दीवाना, पागल,
लापता ……………………………..

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